प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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व्यंजन संज्ञा पुं॰ [सं॰ व्यञ्जन]

१. व्यक्त या प्रकट करने अथवा होने की क्रिया ।

२. शब्द की तीन शक्तियों में एक का नाम । विशेष दे॰ 'व्यंजना' ।

३. चिह्न । निशान । रूप ।

४. अवयव । अंग ।

५. मूँछ ।

६. दिन ।

७. पेड़ू के नीचे का स्थान । उपस्थ ।

८. तरकारी और साग आदि जो दाल, चावल, रोटी आदि के साथ खाए जाते हैं ।

९. (साधारण बोलचाल में) पका हुआ भोजन ।

१०. वर्णमाला में का वह वर्ण जो बिना स्वर की सहायता से न बोला जा सकता हो । हिंदी वर्णमाला में 'क' से 'ह' तक के सब वर्ण व्यंजन हैं ।

११. गुप्तचर या गुप्तचरों का मंडल । वयस्कता ।

१२. उ॰—जब पूर्वोक्त प्राग्रूप प्रकट हो जाय तब उसको रूप ऐसे कहते हैं और संस्थान, व्यंजन, लिंग, लक्षण, चिह्न और आकृति यह छह शब्द रूप के पर्याय हैं ।—माधव॰, पृ॰ ५ ।

१३. निदान । लक्षण (को॰) ।

१४. लिंगद्योतक या स्मारक चिह्न । जैसे, मूँछ दाढ़ी, स्तन आदि (को॰) ।

१५. स्मारक (को॰) ।

१६. कपट वेश । छद्म वेश (को॰) ।

१७. बलि पशु का संस्कार या पूजन (को॰) ।

१८. पंखा । व्यंजन (को॰) ।