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प्रकाशितकोशों से अर्थ सम्पादन

शब्दसागर सम्पादन

त्रै वि॰ [सं॰ त्रय] तीन । उ॰—ज्यों अति प्यासी पावै मग में गंगाजल । प्यास न एक बुझाय बुझँ त्रै ताप बल ।—केशव (शब्द॰) । यौ॰—त्रैकालिक ।