अंकुर
संज्ञा
बीज से पत्ते निकलने से पहले निकलता है।
प्रकाशितकोशों से अर्थ
शब्दसागर
अंकुर ^१ संज्ञा पुं॰ [ स, अङ्कृर] [वि॰ अङ्कुरित, हिं॰ अंकुरना]
१. अँखुआ । गाभ । अँगुसा । उइ॰— पाइ कपट जल आंकुर जामा ।— मानस, २ ।
२३. ।
२. ढ़ाभ । कल्ल । कनखा । कोपल । आँख ।
३. यव का नया नया आँखुआ जो मांगलिक होता है । उ॰— अच्छत अंकुर रोचन लाजा । मंजुल मंजरि तुलसि बिराजा ।—मानस, १ ।४६ । क्रि॰ प्र॰— आना । उगना ।— जमना ।— निकलना ।— फूटना ।— फोड़ना ।— फेकना ।— लेना ।
४. कली ।
५. संतति । संतान । उ॰— (क) ' हमरे नष्ट कुल में ये एक अंकुर बचा है, इससे हमारा वंश चलेगा ।' — श्रीनिवास ग्रं॰, पृ॰ १४६ । (ख) थे अंकुर हितकर कलश पयोधर पावन ।— साकेत, पृ॰ २
०३. ।
६. नोक ।
७. जल । पानी ।
८. रूधिर । रत्त्क । खून ।
९. रोम । रोआं ।
अंकुर ^२ संज्ञा पुं॰ [फा॰ अंगूर] मास के बहुत छोटे लाल लाल दाने जो घाव भरते समय उत्पन्न होते है । भराव । अंगूर ।